धर्म विशेष

माता अंजनी धाम जहा हनुमान जी का जन्म हुआ -----------.

               झारखण्ड से १०० किमी. दूर गुमला जिले में माता अंजनी धाम स्थित है, हमारे महापुरुषों ने अपने समाज को जगाने सभ्य, सुशील, बिनम्र और अध्यात्मिक बनाने के लिए समय- समय पर धार्मिक मूल्यों का समयानुसार परिवर्तन किया गया, लेकिन वैदिक मूल्यों और भारतीय चेतना के आधारभूत मूल्यों की उपेक्षा नहीं की इस नाते हिन्दू समाज पुरातन से पुरातन होकर भी अत्याधुनिक बना हुआ है कभी-कभी कुछ निरासा बादी लोग कहते है क्या होगा भारत का बचेगा या नहीं--- ? लेकिन हम हिन्दू समाज के लिए इतने साधू, संत, महात्मा और हिन्दू संगठन लगे हुए है निश्चित ही मानवता की चिंता तो भगवान  को भी होगी ही सनातन धर्म, वैदिक हिन्दू संस्कृति निश्चित ही आदि काल से है अनादि काल तक रहेगी, मै झारखण्ड के गुमला जिले में अंजनी माता स्थान की बात कर रहा था वहा जंगल में मावोबादी अपनी ही चलाने की फितरत में रहते है, जब मैने गुमला --लोहरदगा मार्ग पर अंजनी धाम का बोर्ड देखा गाड़ी को धाम की तरफ मोड़ दिया वहा का दृश्य अद्भुत था, टोटो बाज़ार से ५ किमी. की दुरी पर माता अंजनीधाम कई बर्ग किमी. में स्थित है, जहा ३६५ तालाब थे कही-कही खुदाई हुई पुराने- पुराने मंदिरो की मुर्तिया, व मंदिरो के अवशेष मिले है इससे यह सिद्ध होता है की यहाँ कभी बहुत बड़ा तीर्थ स्थान था, यही पर माता अंजनी का मंदिर है जो अपने बाल पुत्र महावीर हनुमान जी को अपने गोद में लिए हुए है, पुराना भब्य मंदिर वहा से ऊपर ६ किमी. दूरी पर पहाड़ में स्थित है.
           यही वह स्थान है जहा हनुमान जी का जन्म लाखो वर्ष पहले त्रेता युग में हुआ था सैकड़ो मंदिर थे लेकिन इस जागृत और अध्यात्मिक स्थान को इस्लामिक काल में नष्ट कर दिया गया उस स्थान को देखने से लगता है कि बड़ी ही योजना से हमारे तीर्थो के साथ खिलवाड़ किया गया है आज भी सरकारे आती है -जाती है कोई ध्यान नहीं है, गुमला से २० किमी. की दुरी पर पम्पापुर [पालकोट] स्थित है जो इसका प्रणाम है, यहाँ पर प्रत्येक रामनउमी पर मेला लगता है हजारो लाखो की संख्या में हिन्दू जनता- वनवासी, गिरिवासी और अन्य समाज के लोग महाबीरी झंडा लेकर अंजनी माता के दरबार में आते है, यहाँ से ४ किमी. की दूरी पर धम्घसिया में खुदाई से गुफा मिली है जिसमे पुरानी मुर्तिया और कलाकृतिया मिली है. 
            दुर्भाग्य है कि बड़ी ही योजना बद्ध तरीके से जहा अंजनीधाम हो और टांगीनाथ जैसा धाम हो वहा पर चर्च ने ईसाई मिशनरियों का जाल बिछाकर भोले-भाले वनवासियों का धर्मपरिवर्तन करा जिले में ३५% बिधर्मी बना दिए गए है जो भारत बिरोधी गति बिधियो के काम में लगे रहते है आज आवस्यकता है कि इन धार्मिक स्थानों को जागृत करने का--! हिन्दू समाज इसके लिए तैयार हो और लाखो की संख्या में जाने से धार्मिक पर्यटन तो बढेगा, वहा पर रोजगार के अवसर का सृजन भी होगा, स्वतः ही धर्मान्तरण अपने-आप बंद ही नहीं होगा बल्कि बिधर्मी बने हुए बंधुओ की घर वापसी भी होगी.        

5 टिप्‍पणियां

lokendra singh rajput ने कहा…

माँ अनजानी के धाम से परिचय करने लिए धन्यवाद...

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

महावीर वज्रांग बली के जन्मस्थल से परिचय कराने के लिये आपका हार्दिक आभार!

Sujeet Singh ने कहा…

ऐसे गम हुए धार्मिक स्थानों को हम लोगो के बीच में परिचय करने के लिए साभार !!
ये सच है कि दुर्गम स्थानों पर ईसाई मिशिनारिया जा जा के धर्म परिवर्तन का काम कर रही है | जिससे इस धार्मिक स्थान कि महत्ता वहाँ के लोगो के लिए कम होने लगी है |

www.lifemasti.co.in

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

bahut dukh hua jaan kar ki log kaise amada karte hain dharam parivarthan ke liye.

vichaarneey post.

बेनामी ने कहा…

मेरे को 3 जगह मिला है हनुमान जी के जन्म स्थान के जगह का
एक कर्नातक भी है जो की किस्कीन्धा मे है और एक नासिक से कुछ दूरी पे है लेकिन इसमे सही कोन है कृपया बताने का कस्ट करे