अकबर और मीना बाजार


मंगलवार, 22 सितंबर 2015

       
             भारत में देश व संस्कृति बिरोधी इतिहासकारों की कमी नहीं रही है कोई अंग्रेज भक्त (चर्च+इस्लाम) इतिहासकार, कुछ प्रगतशील सेकुलर इतिहासकार, कोई वामपंथी इतिहासकार ऐसे अनेक प्रकार के देशद्रोही इतिहासकार हैं जो  भारत भारतीयता से कोई मतलब न रखते हुए इस संस्कृति के बिरोध में ही अपनी मर्यादा समझते हैं, जब देश में शंघर्ष काल था हमारे क्रन्तिकारियो को विजय श्री मिलने ही वाली थी कि हमारे राष्ट्रवादी इतिहासकार कोई भगवत दत्त होंगे, कोई के.एम. मुंशी रहे होंगे, सत्यकेतु विद्यालंकार जैसे राष्ट्रवादी इतिहासकार भी थे जिन्होंने देश का सच्चा इतिहास लिखा 'भारत का बृहत्तर इतिहास', वैदिक वांग्मय का इतिहास रामायण महाभारत आधारित इतिहास लिखे गए थे दुर्भाग्य ऐसा था कि देश का प्रधानमंत्री गैर भारतीय होने से वामपंथियों द्वारा रचित इतिहास लिखा गया वही पाठ्यक्रम में लागु हुआ, जो 'अकबर केवल २०० से ४०० वर्ग किमी' का शासक था उसे पुरे भारत का शासक बता दिया गया जिस मेवाड़ का शासन अफगानिस्तान से लेकर मालवा तक था उसे इतिहास ने स्थान नहीं दिया और अकबर को महान बताया गया यदि अकबर महान था तो महाराणा क्या थे ? क्या प्रत्येक भारतियों के घरों में अकबर का चित्र लगता है नहीं भारतीहृदय स्थल पर तो महाराणा प्रताप ही महान हैं वे ही प्रत्येक भारतीय के घरों में दिलों में वसते हैं। 
         एक मेरे मित्र ने मुझसे पूछा कि अपने एक फोटो फेसबुक पर लगाया है जिसमे एक राजपूतानी किरण देवी अकबर के सीने पर चढ़ी हुई है इसका मतलब क्या है मै उसे ही बताना चाहता हू 'बाबर नामा अथवा अकबर नामा' कोई इतिहास नहीं यह तो उनकी प्रसंसा के 'भाड़वा गीत' के अतिरिक्त कुछ भी नहीं, अकबर कितना कमीना था इसका अंदाजा इससे आप लगा सकते है कि वह अपने राजधानी में 'मीना बाजार' लगवाता था जिस मीना बाजार में केवल हिन्दू लड़कियां ही जाती थी अकबर महिला वेश में उस बाजार में जाता था किसी न किसी हिन्दू क्षत्राणी को अपने हरम का शिकार बनाता था एक दिन एक क्षत्राणी किरण देवी जो अकबर के दरबारी कि पत्नी थी शिकार बानी जब उसे अपने हरम में ले गया तो उस क्षत्राणी उसके छाती पर सवार हो कटार निकाल ली अकबर को ऐसे उम्मीद नहीं थी वह निश्चिन्त था जब रानी सीने पर हमला किया तो अकबर ने क्षमा मांगी और फिर कभी मीना बाजार न लगवाने कि कसम खायी इसलिए वह महान कैसे हो सकता है वह तो कमीना था नकि महान। 
 मा अटल जी की एक कबिता है ----------!
     बाबर के पुत्रों से पूछो क्या याद तुम्हें मीना बाज़ार--------! ( मा अटल बिहारी वाजपेयी )   
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