धर्म विशेष

डा.आंबेडकर -----के जन्मदिन परबिशेष वे राष्ट्रीयता के अग्रदूत थे.

 राष्ट्रियता की परख--!
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डा.भीमराव रामजी अम्बेडकर भारत के महँ सपूतो में से थे आज कुछ लोगो ने उन्हें एकांगी महापुरुष बनाने को ठानी है ,डा.आंबेडकर भारत की चिति को पहचानते थे, उन्हें भारत की आत्मा क़ा ज्ञान था वे भारत के स्वतंत्रता सेनानी नहीं ही प्रथम कानून मंत्री भी थे वे सामाजिक समरसता के अग्रदूत ,संबिधान निर्माण समिति के सदस्य भीथे, भारतीय संबिधान लोकसभा में पेस करते हुए ,संस्कृत भाषा को राष्ट्र भाषा के रूप चाहते थे पंडित नेहरु के बिरोध के कारण संस्कृत राष्ट्र भाषा नहीं हो सकी ,डा.आंबेडकर जानते थे की भारतीय बांगामय संस्कृत में है ,भारत आजाद हो चूका है,सभी भाषाओ की जननी को उसका अधिकार मिलना ही चाहिए बिना संस्कृत के हम अपने इतिहास, परंपरा को नहीं जान सकते वेद, उपनिषद पुराण, ब्रह्मण ग्रन्थ सभी कुछ इसी भाषा में है, वे मुसलमानों के भारत में रहने के पक्षधर नहीं थे, उनका कहना था की देश द्विराष्ट्र बाद के सिद्धांत पर बटा है इस नाते मुसलमानों को पाकिस्तान जाना चाहिए नहीं तो समस्या क़ा समाधान नहीं होगा ,उनकी बात नहीं चली आज फिर समस्या जैसी की तैसी ही है  
 समरसता के बाहक--!
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वे समता ममता बन्धुत्व के आधार पर सामाजिक संरचना होनी चाहिए ,वे समाज से पीड़ित थे दिन दुखियो के प्रति अपर श्रद्धा थी उनको बराबरी क़ा दर्जा दिलाना चाहते थे,जिससे हमारा समाज एक बना रहे, लेकिन हिन्दू समाज को बिलग होना देधना नहीं चाहते थे.वे यह जानते। थे की हन्दू समाज से अलग होना परिकिया धर्म को स्वीकार करना भारतीयता से अलग होना है, इस नाते उन्होंने हैदराबाद के नबाव की जागीर और धन को अस्वीकार कर दिया इतना ही नहीं अंग्रेजो की भी कोई चल कामयाब नहीं होने दिया,उन्होंने कहा की हम भारतीय धर्म में रहकर कुरीतियों से संघर्ष करुगा , उन्होंने गरीबो, दलितों, के अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई और भारत में पल्लवित निर्मित बौद्ध धर्म को स्वीकार किया.उन्होंने कहा की यदि हम क्रिश्चियन अथवा इस्लाम धर्म स्वीकार करता हु तो मेरी आस्था भारत में न रहकर रोम,बेतिकन,अरब देश होगे.इस नाते मई भारतीय धर्म बौद्ध धर्म स्वीकार करता हु । मुस्लमान, क्रिश्चियन दोनों मिशनरी धर्म है ,वे धर्मान्तरण के कट्टर बिरोधी थे।
उनके जन्म दिन पर हार्दिक श्रधांजलि. धर्मान्तरण ही राष्ट्रान्तरण है ऐसी उनकी मान्यता थी।

1 टिप्पणी

aarya ने कहा…

सादर वन्दे !
काश की सभी लोग इस सच्चाई को समझे व स्वीकार करें.
रत्नेश त्रिपाठी