धर्म विशेष

कुरान और तलवार के बल समाप्त करती हुई बैभवशाली संस्कृति-और उनकी इतिहास की जड़े ----------?

 विदेशों में भी अपने को जानने--!
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 एक हमारे मित्र है वे भारतीय वन्शावली लेखन और उसके संबर्धन का कार्य करते है उनके एक मित्र मुस्लिम राष्ट्र लीबिया में प्रोफ़ेसर हैं  उस प्रोफ़ेसर का एक दिन हमारे मित्र रामप्रसाद जी के पास आया कि एक हमारे मित्र है जो इस्लाम मतावलंबी है आप से बात करना चाहते है मुस्लिम प्रोफ़ेसर ने फोन पर नमस्ते करते हुए कहा सुना है की आप बन्शावली के बारे में कुछ जानते है, रामप्रसाद जी ने उससे पूछा की आपके इतिहास में क्या लिखा है ? उसने बताया की हमारे इतिहास में तो ये लिखा है की हमारी कोई संस्कृति थी ही नहीं हम तो कबीलाई थे, आपस में लड़ते रहते थे जंगली थे हमारा कोई गौरव पूर्ण इतिहास ही नहीं था, हमें ज्ञात ही है राजा बिक्रमादित्य जो भारत के चक्रवर्ती सम्राट थे महाभारत के पश्चात् उन्होंने धार्मिक स्थानों पुनर्स्थापना की अयोध्या, मथुरा, काशी, जनकपुर, कांची, अवंतिका, ऐसे तमाम धार्मिक स्थानों का जीर्णोद्धार कराया जिसमें  मक्का का महादेव मक्केस्वर मंदिर सामिल है, शोधकर्ताओ को पता है कि मुहम्मद साहब के पूर्वजों को जिन्हें विक्रमादित्य ने वहा की जागीर दिया था वे उनकी संतान थे और मुहम्मद साहब तीस वर्ष तक वहा के शासक भी थे.
अरब दशों में भी मानवतावादी विकसित संस्कृति थी-!
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मुहम्मद साहब ने अपना खतना नहीं कराया था वहाँ एक मानवतावादी संस्कृति की बिकसित परंपरा थी इस्लाम के आने के पश्चात् क्या से क्या हो गया ? क्या वास्तव में वहा के लोग जाहिल, गवार, जंगली थे या कुछ और ? कुरान और तलवार के बल पर मानवीय संस्कृति को नष्ट कर दिया और कहाकि इस्लाम के पहले लोग यानी मुसलमानों के पुर्बज जाहिल थे, जंगली थे ऐसा ही इस्लामिक इतिहासकार बताते है बर्बर कट्टर पंथी मुसलमान जहा भी गए वहा के केवल समाज को ही नष्ट नहीं किया बल्कि वहाँ की संस्कृति भी समाप्त कर दिया, यूनान, मिश्र, बेवोलानिया, मेटोपोटासामिया इत्यादि अपने समय की समृद्धिशाली संस्कृति थी जिसे इस्लाम ने समाप्त कर दिया वहाँ के लोगो को केवल यही पता है की हमारे पुर्बज मुर्ख और जाहिल थे, भारत के एक कवी ने लिखा है की ''यूनान, मिश्र, रोमा सब मिट गए जहा से, कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी'', --- आखिर वो कौन सी बात है यह हमें सोचना होगा-- कुरान और तलवार लेकर पश्चिम एशिया, मध्य एशिया को रौदा ही नहीं बल्कि उनके  इतिहास को ही समाप्त कर दिया और उन्हें बताया कि तुम्हारे पुर्बज जाहिल, गवार, और जंगली थे असभ्य थे --- कौन नहीं जनता कि बिक्रमादित्य का शासन कितना वैभव सपन्न था कितनी मानवीय संसकृति थी अरब, इरान,  इराक ये सारे देशो में संस्कृतियों का प्रवाह तो बहुत पुराना था उसे क्यों नष्ट किया गया वास्तव इस्लाम संगीत, कला  व किसी प्रकार की प्रगतिशीलता को स्वीकार नहीं करता इसलिए इन्होने केवल तलवार के बल धर्मपरिवर्तन ही नहीं किया बल्कि पुरानी परंपरा, संस्कृति और  इतिहास को भी समाप्त कर दिया, बताया की तुम्हारे पुर्बजो का कोई स्वाभिमान पूर्ण इतिहास था ही नहीं इसलिये इस्लाम केवल मूर्ति पूजा का बिरोधी ही नहीं तो ये इतिहास और परंपरा का भी बिरोधी है.
संस्कृति को बिकृति करने काम ----!
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जहाँ सारा विश्व आज अपना इतिहास परंपरा खोज रहा है कि इसके पहले हम क्या थे ? वहीं कुरान के अधम अत्याचार ने मुसलमानों  के पचासों देशो ने अपनी गौरव पुँर्ण परंपरा और संस्कृति को गँवा दिया उन्हें अपने पूर्वजो पर शर्म आती है क्योंकि उन्हें बताया गया कि तुम्हारे बाप जाहिल, गवार और असभ्य थे, कुरान मानवता का कोई हित तो नहीं कर सका बल्कि मानव समाज के उत्कृष्टता को समाप्त करने का प्रयास किया, इस्लाम के अनुयायियों को नर पिशास बना दिया जो आज मानवता के शत्रु बनकर दुनिया को आतंकबाद के अंगारे पर बैठाने का असफल प्रयास कर रहे हैं, अफगानिस्तान की खुली संस्कृति महिलाओ की शिक्षा तथा कश्मीर की केशर क्यारी, अपनी अनुपम उदार संस्कृति सब के सब इस्लामिक आतंकबाद की भेट चढ़ गयी, यही है कुरान की शिक्षा जो तलवार के बल पर दुनिया का रक्त पिपासु बनी हुई है और उन बेचारे इस्लाम के अनुयायियों की जड़ो को ही समाप्त कर दिया आज उन्हें पता ही नहीं कि इस्लाम के पहले क्या थे या क्या था, कहा थे और क्या थे ?
         यह सर्वबिदित ही है कि कुरान मानव समाज को कुछ दे तो नहीं सका बल्कि मानवता का शत्रु बनकर खड़ा हो गया !........!

10 टिप्‍पणियां

ZEAL ने कहा…

बहुत सटीक लिखा है आपने। गहन विश्लेषण।

सुजीत कुमार सिंह ने कहा…

ये बातें हमारे देस के या किसी भी देस के मुस्लिमो को नही समझ में आता है | इन्हें सिर्फ इस्लामीकरण के अलावा कुछ नही दिखता है | की हमारा इतिहाश क्या था ? क्यों हम आज भी वही है| आधुनिक युग में भी इनके मस्तिष्क में इस्लामीकरण का गोबर भरा हुआ है |

जय जय भारत

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

चूँकि अब धीरे-धीरे हम सब एक बिलकुल नए-नवेले साल २०११ में पदार्पण करने जा रहे है,
अत: आपको और आपके परिवार को मेरी और मेरे परिवार की और से एक सुन्दर, सुखमय और समृद्ध नए साल की शुभकामनाये प्रेषित करता हूँ ! भगवान् करे आगामी साल सबके लिए अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और शान्ति से परिपूर्ण हो !!

नोट: धडाधड महाराज की बेरुखी की वजह से ब्लोगों पर नजर रखने हेतु आपके ब्लॉग को मै आपकी बिना इजाजत अपने अग्रीगेटर http://deshivani.feedcluster.com/से जोड़ रहा हूँ, अगर कोई ऐतराज हो तो कृपया बताने का कष्ट करे !

दीर्घतमा ने कहा…

श्री गोदियाल जी मै आपके बिचारो को जनता हु लगातार पढता रहता हु आपके इस कृत्या का हमें कोई एतराज नहीं है. आप हमारे पोस्ट पर ए बहुत अच्छा लगा.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बहुत अच्छी बात लिखी है..

संजय भास्कर ने कहा…

नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें ...कबूल करें

: केवल राम : ने कहा…

आपके विचार चिंतनीय हैं ...पूरी पोस्ट बहुत बहुत सटीक है
नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें ...स्वीकार करें

Harman ने कहा…

nice post..


Lyrics Mantra
Ghost Matter

JHAROKHA ने कहा…

aadarniy subedar ji
aapki kalam ka bhi jawab nahi .koi bhi vishhy ho us par aapki lekhni usko aur nikhar deti hai.
gahan abhivykti ki aapki aseem parakashtha ko naman karte hue nav -varsh ki aapko hardik shubh kamna .
poonam

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

आँखे खोलने वाला आलेख.!
नव वर्ष की हार्दिक बधाई!
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ