लोकमान्य बालगंगाधर तिलक--स्वराज्य हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है.

             लोकमान्य तिलक महान राष्ट्रवादी लोकप्रिय राजनेता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, भारतीय चिंतन के आधार पर भारतीय गौरव को वापस लाना चाहते थे, वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रगणी योधा थे उनका जन्म २३ जुलाई १८५६ को रत्नागिरी जिले में हुआ था वे भारत के ऐसे परिवार में पैदा हुए जिन्हें आधुनिक शिक्षा की सुबिधा उपलब्ध थी, वे पहले भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने पूर्ण स्वराज्य की माग की और घोषणा किया कि ''स्वराज्य हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है हम उसे लेकर रहेगे'' यह नारा भारतीय जनता व देश भक्तो का प्रेरक पुंज बन ही नही गया बल्कि बहुत प्रसिद्द हुआ और वे लोकमान्य कहलाने लगे, भारतीय क्षितिज पर उनका उनका नाम सबसे ऊपर था ''लाल, बाल ,पाल'' ऐसे महापुरुषों के पबित्र हाथो में स्वतंत्रता का नेतृत्व था, देश आज़ादी हेतु राष्ट्रबाद का आवाहन किया वे यह जानते थे कि भारतीय राष्ट्रबाद की आत्मा भारत के धर्म में बसती है, इसी कारण उन्होंने धर्म को आधार बनाकर भारत को जगाने हेतु घर-घर में पूजे जाने वाले भगवान गणपति का सार्बजनिक पूजा शुरू किया जिसे आज गणेश उत्सव के नाम से जाना जाता है यह उत्सव इतना लोकप्रिय हुआ की भारत खड़ा होने लगा और स्वतंत्रता का सन्देश देने का सबसे कारगर हथियार बन गया, वे हिन्दू राष्ट्र के प्रथम पुरोधा थे उन्हें हिन्दू राष्ट्र का जनक कहा जाता है.
         तिलक जी का ही अनुसरण कर बिपिनचन्द्र पाल ने बंगाल में दुर्गा पूजा को सार्बजनिक रूप में खड़ाकर स्वतंत्रता आन्दोलन को तीब्र गति प्रदान की, स्वतंत्रता आन्दोलन में १९०८ में खुदीराम बोस बम हमले के समर्थन के कारण लोकमान्य तिलक को आठ वर्ष की सजा हुई जिसको उन्होंने साधना के रूप में स्वीकार किया और जेल में श्रीमदभागवत गीता का भाष्य किया जिसे हम 'गीता रहस्य' के नाम से जानते है यह ग्रन्थ इतना प्रसिद्द हुआ कि क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणा श्रोत साबित हुआ.
           राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के भी वे प्रेरणा श्रोत थे जब डाक्टर जी अपनी पढाई पूरी कर नागपुर आते है तो क्या करना क्या नहीं करना असमंजस में थे-? क्यों कि कांग्रेस तुष्टीकरण प्रारंभ कर चुकी थी वे तिलक जी से मिलने हेतु पूना जाते है तिलक जी डाक्टर जी को एक सप्ताह अपने साथ रखते है और उनका अध्ययन कर उन्हें नागपुर जाते समय 'सिवनेरी ' के किले होकर जाने के लिए कहा 'सिवनेरी का किला' जिस स्थान पर शिवा जी महराज का जन्म हुआ था ऐसे प्रेरणा दायक स्थान पर डाक्टर जी पहुचे देखा की जिस शिवा जी महराज ने हिन्दू पद्पाद्शाही के लिए जीवन भर संघर्ष किया उस स्थान पर एक मजार बनी हुई है एक मस्जिद भी है आखिर ऐसा क्यों --? यह बात डाक्टर जी के मन को घर कर गयी और उन्होंने सोचा की हिन्दू समाज का संगठन ही भारत को सशक्त बना और स्वतंत्रता दिला सकता है हिन्दू समाज ही भारत का मूल समाज है बिना हिन्दू के भारत की कल्पना भी बेकार है हिन्दू समाज ही सास्वत स्वतंत्रता की गारंटी हो सकता है यदि यह कहा जाय कि डाक्टर हेडगेवार के भी प्रेरणा श्रोत तिलक जी ही थे तो यह अतिसयोक्ति नहीं होगा और उसी बिचार मंथन में से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना होती है, डाक्टर हेडगेवार जी लोकमान्य तिलक जी को अपना आदर्श मानते थे डाक्टर जी को लगा की तिलक जी ने हमें इसी कारण इसी काम के लिए यहाँ इस रास्ते से भेजा था और उन्हें मार्ग मिल गया कुछ लोगो का मत है, ''लाल,बाल,पाल'' के विचारों का प्रकटीकरण ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हैं ।       
        तिलक जी १९२० एक अगस्त को मुंबई में काल के गाल में समां गए उनके अंतिम संस्कार में दो लाख लोग सामिल हुए जो अद्भुत ही नहीं अदुतीय भी था, आज जो भी सांस्कृतिक राष्ट्रबाद का जागरण हो रहा है या संघर्ष चल रहा है कही न कही लोकमान्य तिलक की ही प्रेरणा का परिणाम है और वे हमेसा हिन्दू समाज व देश भक्तो के प्रेरणा के केंद्र बने रहेगे, ऐसे थे हमारे लोकमान्य बालगंगाधर तिलक, उनके जन्म दिन पर आज सभी देश वासियो को हार्दिक बधाई.

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