धर्म विशेष

इस्लामी आक्रमण कारियों की प्रतिशोध के रूप में किया सुवर पालन----!

न हिन्दू पतितों भवेत---!
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वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था तो थी लेकिन ऊँच-नीच, छुवा-छूत तथा भेदभाव नहीं था यह समाज करोणों वर्ष पुराना है इस हिंदू संस्कृति को ऋषियों ने नदियों, वनों व पहाड़ों में वड़े-बड़े परिश्रमों द्वारा सुसंस्कृत बनाया इसी को भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा--- "चातुर्वर्ण्य मया सृष्टा, गुण कर्म विभागशः" कोई भी किसी वर्ण में अपनी योग्यता अनुसार जा सकता था, वैदिक काल में ''ऋग्वेद'' के कई सूक्तों के मन्त्रद्रष्टा ''एकं सदविप्रा बहुधा वदन्ति''  के प्रणेता 'दीर्घतमा मामतेय, कवष एलुष' जैसे सूद्र ऋषि वेदों के मंत्र द्रष्टा होकर ब्राह्मण वन जाते है धरती के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट ''राजा सुदास'' सूद्र हो जाते है, भारत के महान विद्वान भारतीय वांग्मय पर अधिकार रखने वाले भारतीय संविधान के निर्माता आधुनिक मनु ''डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर'' कहते है कि ये वो सूद्र नहीं है वे कहते है कि वैदिक काल में जातीय ब्यवस्था नही थी वल्कि वर्ण व्यवस्था थी जिसमे कोई छुवा-छूत भेद-भाव नहीं था कोई भी किसी वर्ण में हो सकता था डॉ अम्बेडकर कहते है कि छुवा-छूत भेद-भाव इस्लामिक काल की देन है वर्तमान जिसको हम सूद्र समझते है वह वर्ण व्यवस्था न होकर इस्लामिक काल कि थोपी हुई जातियां है।

धार्मिक ग्रंथो में भेद-भाव को स्थान नहीं
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जब हम भारतीय वांग्मय का अध्ययन करते हैं तो ध्यान में अत है कि किसी भी ग्रन्थ में इसका कोई महत्व नहीं है वर्तमान में जिन जातियों को अछूत समझा जाता है उन जातियों का किसी भी ग्रन्थ में कोई वर्णन नहीं है इन सब जातियों का आगमन इस्लामिक काल में हुआ वैदिक काल, रामायण ही नहीं जब आप उपनिषदों अध्ययन करेगे ब्राह्मण ग्रंथो अथवा महाभारत जैसे ग्रंथों का अध्ययन करेगे, कहीं भी इन अछूत जातियों का वर्णन नहीं मिलता, आर्यसमाज के संस्थापक ''ऋषि स्वामी दयानंद सरस्वती'' कहते है कि भारत का वास्तविक इतिहास हमारे रामायण, महाभारत और ब्राह्मण ग्रन्थ हैं लेकिन दुर्भाग्य यह हुआ कि भारत का जो प्रथम प्रधनमंत्री हुआ वह अराष्ट्रीय ही नहीं वामपंथी भी था इस कारण उसे भारतीयता, राष्ट्रीयता और सनातन धर्म से कोई सरोकार नहीं था परिणाम जितना भारतीय वांग्मय इतिहास का नुकसान इस्लामिक, ब्रिटिश काल में नहीं हुआ उससे अधिक नुकसान देश विभाजन के पश्चात् हुआ, स्वामी विवेकानंद कहते हैं हिन्दू धर्म वैज्ञानिक धर्म है जो तर्क पर सत्य नहीं उतरता वह हिंदुत्व नहीं है।

चंवरवंश के क्षत्रिय अछूत घोषित-------!
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 इस्लामिक हमलो को समज समझ नहीं पाया उसने समझा कि जैसे हमारा धर्म है वैसे ही यह भी कोई धर्म है, लेकिन इस्लाम मतावलंबी तो धार्मिक थे ही नहीं वे तो आतंकवादी थे उनका सिद्धांत तो लूट-पाट, हिंसा, हत्या और बलात्कार था वे मानवता का नाम तक जानते ही नहीं थे उनका पहला संघर्ष ''चवरवंश'' के राजाओ से हुआ चवरवंश के राजाओ का राज्य भारत के ''उत्तर-पश्चिम की दिशा में था सिंध के ''राजा दाहिर'' की पराजय के पश्चात् तीन सौ वर्षों तक चवर राजाओं ने इस्लामिक सत्ता को रोके रखा इसलिए मुसलमान इस वंश से बहुत चिढ से गए और इस वंश से घृणा करने लगे इतना ही नहीं भारत में सत्ता पर कब्ज़ा करने के पश्चात् अन्य राजाओ से संवंध स्थापित कर इस वंश का वहिस्कर करवाने का कार्य किया इन्हें अछूत घोषित करवाया, एक दुसरे प्रकार के अछूत जातीय हैं वे कौन हैं तो जो मंदिरों के रक्षक व् पुजारी थे संघर्ष किया चमरवंश के सबसे प्रतिष्ठित संत थे ''संत रविदास'' सम्पूर्ण भारत आर्यावर्त में सर्वाधिक लोकप्रिय हो गए मेवाड़ के महाराणा सांगा ने उनसे दीक्षा ले उन्हें राजगुरु बनाकर चित्तौड़ में उनका आवास निष्चित किया वे हिन्दू मुसलमानों के बीच दीवार वनकर खड़े थे इन्ही कारणों को लेकर सर्वाधिक हिदुत्व के रक्षक होने के नाते इस राजवंश को अछूत किया गया।
           
समाज में जबरदस्त प्रतिक्रिया----!
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 हिन्दू समाज के अन्दर कई प्रकार की प्रतिक्रिया शुरू हो गयी जहाँ स्वाभिमानी राजाओ ने इस्लामी सत्ता को चुनौती दी वही सामान्य हिन्दू समाज ने मज़बूरी में यवनों, तुर्कों, मुगलों के यहाँ काम तो करते लेकिन उन्हें बहुत नीच ही समझते थे, घर से पानी पिकर जाना फिर लौटकर घर पर ही पानी पीना उन्होंने मैला उठाना स्वीकार किया लेकिन मुसलमान होना स्वीकार नहीं किया, हिन्दू समाज की सुरक्षा के कदम उठाये इस वंश के लोगो ने अपना घर गाँव के बाहर बनाया और प्रतिक्रिया व प्रतिशोध हेतु  सुवर पालन शुरू किया एक तो सुकर भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है दुसरे मुसलमानों के यहाँ सुवर नापाक माना जाता है, ''सिक्ख गुरुओ'' ने प्रतिक्रिया में सिर में कंघा लगाना अनिवार्य किया जो सुवर की  हड्डी से बनता है, शादी बिबाह में भोजन परोसते समय सुवर की हड्डी भोजन पात्र में अस्पर्स कराया जाता था, समाज मुसलमानों को घृणा का पात्र समझता था आज भी हिन्दू समाज मुसलमानों से उतना ही घृणा करता है जितना उस समय करता था । 
संदर्भ ग्रंथ-------!
     1- महाभारत -वेदब्यास
     2- भागवत गीता- शंकर भाष्य
     3- चमार जाती का वैभवशाली अतीत- डॉ विजय सोनकर शास्त्री
     4- शूद्रों की खोज- डॉ भीमराव आंबेडकर
     5- उड़ता त्रिशूल- सहिया सुमानी
     6- धर्म योद्धा -सुबेदार जी
     7- राजस्थान का इतिहास- कर्नल टाट
     8- पिछ्ड़ी जातियों का इतिहास- डॉ विजय सोनकर शास्त्री

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